क्या हम गायों के लिए चारे की जगह गन्ना दे सकते हैं ??

गायों को गन्ना खिलाने की शुरुआत १९७० के शुरुआत में हुई जब भारत और अन्य देशों में चीनी कारखानों ने संकट का सामना किया और किसानों को अपनी फसल के लिए वैकल्पिक उपयोग को अपनाना पड़ा जीसकी वजह से किसानों ने गाय को गन्ना खिलाना शुरू कर दिया। शुरुआत में इसे गर्मियों के मौसम में जब हरे चारे की कमी होती तभी इस्तेमाल किया जाता था पर कुछ ही दिनों में किसानों ने गायों को सिर्फ गन्ना ही खिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते ये चलन हिंदुस्तान और अमेरिका में आम बात होगई। कई बार ये देखने में आया है के किसानों को गायों के खाद्य और चारे से मिलने वाले पोषण की जानकारी नहीं होती और अनजाने में वे इस चल रही प्रथा को सही मान बैठते हैं जीसकी वजह से गाय की सेहत ख़राब रहती है।

Sugarcane as fodder for cattle

गाय को गन्ना खिलाते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

पहले हमे ये समझना ज़रूरी है के अगर हम गायों को सिर्फ गन्ना ही खिलाएं और दूसरे किसी भी चारे का इस्तेमाल न करे तो किस प्रकार की हानि हो सकती है। पशु चिकित्सकों से अनुरोध है कि वे जानकारी अपने किसानों तक पहुँचाए।

ज़्यादा दूध देने वाली गायों को गन्ना नहीं खिलाया जाना चाहिए विशेष रूप से जब वे दूध देने की क्षमता के अधिकतम चरण पे हो। गाय के आहार में ४०-४५ % से अधिक गन्ना नहीं होना चाहिए। इसके साथ सोयाबीन मील और यूरिया (१० ग्राम / किलो सूखे प्रदार्थ) देने से दूध में प्रोटीन उत्पादन में बढ़ोतरी मिल सकती है। यदि लूसर्न घास उपलब्ध हो तो यूरिया देने की ज़रुरत नहीं है। गन्ने में प्रोटीन कम और फाइबर ज़्यादा है हालांकि इसे आम तौर पर निम्न गुणवत्ता वाले चारे के रूप में माना जाता है, लेकिन इसमें उच्च सूखा पदार्थ पाचन क्षमता (७४.१९ से ८६.२७ %) और कार्बनिक पदार्थ पाचन क्षमता (६८.२२ से ८५.४१ %) है। क्यूबा में “सैखरीना” नाम का एक उत्पाद उपलब्ध है जिसमें १४% प्रोटीन और ९०% सूखा पदार्थ शामिल है, जो हर टन कटे हुए गन्ने में १५ किलो यूरिया और ५ किलो खनिज जोड़कर तैयार किया जाता है। मिश्रण को बेचने से पहले सुखाया जाता है।

भारत में, २० – २२ किलोग्राम गन्ने को प्रतिदिन लगभग १० – १५ किलो दूध देने वाली क्रॉसब्रेड गायों को खिलाना आम है जीसकी वजह से इन गायों में शरीर की स्थिति स्कोर और प्रजनन क्षमता कम होती है, विशेष रूप से ईस्ट्रस साईकल और गर्भधारण में देरी होती है। यदि ऊपर वर्णित अनुसार संतुलित आहार खिलाया जाये तो इसे रोका जा सकता है। नयी और युवा गायों को आहार खिलाते समय खास ख्याल रखना ज़रूरी है। इनकी फाइबर पाचन क्षमता कम होती है जिसके कारन हमे आहार में गन्ने की मात्रा को भी बदलना पड़ता है (२०-५० %)। एक वैज्ञानिक प्रयास में क्रॉसब्रेड हिफ़ेर को ७०% कटा हुआ गन्ना और १३% प्रोटीन के साथ ३०% कोन्सन्ट्रटे खिलाया गया था जिससे प्रोटीन पाचन क्षमता और स्वास्थ्य मानकों में बढ़ोतरी देखि गयी। जब कॉन्सन्ट्रेट दिन में एक बार खिलाया गया तो बछड़ों ने हर रोज़ वज़न में ८४० ग्राम तो वहीं दिन में दो बार खिलाने से ९५० ग्राम की बढ़ोतरी दिखाई। यह देखा गया है के दिन में दो बार कॉन्सन्ट्रेट दिया गया जाये तो क्रूड प्रोटीन और ऊर्जा का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

अधिक पढे:  गौ पशुओं के आहार में केले के पत्तों का उपयोग


डॉ. अब्दुल समद

पूर्व- डीन और निदेशक महाराष्ट्र पशु और
मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर

 

बाजार में उपलब्ध उत्पाद: 
we3 Plywood, Handle: Wooden Sugarcane And Pineapple Peeling Knife Multifunctional Peeler, Paperback VISION CRAFTED Punjab Variety 85 SugarCane Seeds - 100 Pcs