क्या आप जानते है कि गाय का बंधा होना क्रूरतापूर्ण व्यवहार है ?

जाने-अनजाने में हमारा व्यवहार जानवरों के प्रति अत्यंत ही क्रूरतापूर्ण होता है जो उनके लिये अत्यंत हानीकारक साबित हो सकता है और इन्हीं मे से एक इनको रस्सी या जंजीर से बांधना है। प्राकृतिक रूप से गाय समूह मे रहने कि आदी होती है और यही इन्हे शांत स्वभाव से रहने के लिये प्रेरित करता है। वे अपना पुरा समय आराम और जुगाली करने मे बिता देती है जिससे उनपर किसी प्रकार का कोई तनाव नही आता और यही उनके लिये बेहद सुखदपुर्ण भी है।

कई बार हमें ये लगता है कि इन्हे खुला छोड़ने से वे लड पडेंगी पर यही हम गलती कर जाते है क्योंकि वैज्ञानिक रूप से ये साबित हो चुका है की खुला रखने से प्राणियों का स्वभाव शांत और सुशील रहता है। इसे जानने के लिये हमें खून मे कॉर्टिसॉल हार्मोन की मात्रा को जाँचना होता है और जितना कॉर्टिसोल अधिक होगा उतना हि तनाव अधिक होगा। तनाव कि मात्रा जानने के लिये कॉर्टिसॉल हार्मोन परीक्षण किया जाता है। जब कोई पशु तनाव में रहता है तब उसके शरीर मे इस हार्मोन कि मात्रा बढ़ जाती है। मुंबई पशु चिकित्सा महाविद्यालय के प्रयोग से पता चला है के बंधी हुई गाय के रक्त मे कॉर्टिसॉल का प्रमाण अधिक था जबकी खुले और मैदान में आझाद रहने वाली गायों मे ये प्रमाण बहुत कम पाया गया और इनका स्वास्थ्य भी अच्छा था। कॉर्टिसॉल की मात्रा अधिक होने से ऑक्सिटोसिन हॉर्मोने जो कि दूध निकालने के लिये अत्यंत जरूरी है वो ठीक से निस्तार नही हो पाता और साथ ही प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। वैज्ञानिकों का ये सुझाव है की स्वच्छ दूध उत्पादन के लिये गाय का साफ जगह पर बैठना जरूरी है जिससे उन्हे थन और गर्भाशय संक्रमण से बचाया जा सकता है। पशुओ को खुला बर्ताव और उत्पादकता के लिये शांत वातावरण की आवश्यकता होती है,इसलिये इन्हे बंधा होना नही चाहिये। छोटी रस्सी के साथ इन्हे बांध कर हम इन्हे पेशाब और गोबर मे बैठने के लिये मजबूर करते है जो इनके लिये हानिकारक है इसलिये इन्हे खुला रखें जिससे वे अपना प्राकृतिक व्यवहार कर पाये।

” ध्यान रखें गायों को बांधकर हम उनसे क्रूरता कर रहे है, इन्हे खुला रखना ही सुखद है “