डाउनर काऊ सिन्ड्रोम

डाउनर काऊ सिन्ड्रोम

डाउनर काऊ सिन्ड्रोम (Downer Cow Syndrome) एक मेटाबोलिक डिसीज है जिसमें पशु ब्याने के 2-3 दिन बाद जमीन पर बैठा ही रहता है यह अधिक दूध देने वाली गायों में अधिक होता है इनमें भी हाॅलस्टीन गायें सबसे अधिक चपेट में आती है। विचित्र बात यह है कि इसमें पशु  यु तो सक्रिय सचेत रहता है लेकिन सिर्फ खड़ा नहीं हो पाता है। इसे एक ’’विषेश प्रकार का मिल्क फीवर’’ कहा जा सकता है।  यह रोग किन खास कारणों से होता है यह स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह रोग मिल्क फीवर से ही संबंधित है। ऐसा माना जाता है कि ब्याने के बाद शरीर में प्रोटीन, फाॅस्फोरस, पोटेशीयम की कमी के कारण भी यह रोग हो सकता है। डाउनर काऊ को दो बार कैल्शियम लगाने के बाद भी कोई फर्क नहीं पडता है और पशु खड़ा नहीं हो पाता है।

मिल्क फीवर से ग्रसित पशु को जब इलाज नहीं हो पाता है तो पशु कई घंटों तक बैठा ही रहता है। इससे तंत्रिकाओं मांसपेषियों पर दबाव पड़ता है। पेरेनियल व टिबियल नर्व बुरी तरह से डेमेज हो जाती है। ऐसे में पशु डाउनर काऊ सिन्ड्रोम (downer cow syndrome) से ग्रसित हो जाता है और बारबार सहारा देकर खड़ा करने पर भी खड़ा नहीं हो पाता है। जब ऐसी स्थिति में पशु खड़ा नहीं हो पाता है तो अक्स ऐसे मामलों में दो तीन दिन तक भारी मात्रा में कैल्शियम देने से शरीर में कैल्शियम लेवल काफी अधिक हो जाता है और हृदय की मांसपेषियां अधिक सक्रिय होकर भारी सूजन जाती है। यह हार्ट की मांसपेषियों पर कैल्शियम की ओवरडोज के टाॅक्सिक इफेक्ट के कारण होता है।

  • मिल्क फीवर के इलाज के बावजूद पशु खड़ा नहीं हो पाता है। यद्यपि पशु सक्रिय सचेत होता है तथा मदद करने पर खड़े होने की बारबार कोशिश भी करता है, सहारे से खड़ा करने पर खड़ा हो जाता है, लेकिन सहारा हटते ही गिर जाता है।
  • भूख कम लगती है, पानी भी कम पीता है।
  • रेस्पिरेशन, जुगाली, गोबर मूत्र करना सामान्य होता है।
  • टेम्प्रेचरनाॅर्मल होता है लेकिन कभीकभी रोग की आखरी अवस्था में सबनॉर्मल हो जाता है।
  • पिछले पैर तो मुड़े हुए ही रहते हैं लेकिन अगले पैरों की मदद से पशु बैठाबैठा ही इधरउधर खिसकता रहता है।
  • सामान्य तौर से यह रोग 1-2 सप्ताह तक चलता है लेकिन यह अवधि अलगअलग होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि नर्व और मसल्स का कितना नुकसान हुआ है, पशु के रखरखाव में कितना ध्यान दिया गया है। यदि इस दौरान कोई अन्य इन्फेक्षन हो जाये  तो पशु की हालत गंभीर हो जाती है।
  • जो पशु एलर्ट नहीं है, बिल्कुल नहीं खाता है तो वह कोमा (Coma) में चला जाता है और निढ़ाल हो जाता है।
  • यदि डाउनर काऊ सिन्ड्रोम में कोई पशु सात दिन से अधिक जमीन पर पड़ा ही रहे (recumbancy) तो वह बच नहीं पाता है। लगातार कई दिनों तक बैठे या लेटे रहने से फेफड़े, किडनी, हार्ट की क्रियाये  बुरी तरह प्रभावित होती है। आखिर में सेप्टिसीमिया (septicemia) या मायोकार्डाइटिस से पशु की मौत हो जाती है।
  • मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि जो पशु मिल्क फीवर का इलाज देने के बाद भी 24 घंटों तक बैठा ही रहता है तो यह डाउनर काऊ सिन्ड्रोम समझा जाना चाहिये। ऐसे में इसे हापोकेल्षिमिया (hypocalcaemia), हाइपोमेग्नीसिमीया, स्पाइनल कोर्ड की चोट आदि नहीं समझना चाहिये।

Clinical Pathology


1. Normal blood Ca, Mg,
या बहुत कम।
2. Blood glucose, Potassium, and phosphorus
3. Serum myoglobin level
4. Moderate ketonuria and Albuminuri

सही डायग्नोसिस के लिये  पहले यह जानकारी करेंः

  1.  गाय सामान्य ब्याई थी या ताकत से बछड़े को बाहर निकाला गया?
  2.  क्या ब्याने के बाद पशु खड़ा हो गया था?
  3.  कितने समय से पशु बैठा या लेटा हुआ ही है?
  4.  क्या इस अवस्था में उसके शरीर के नीचे कठोर जमीन थी या मिट्टी, रेत, बोरी, गद्दे, भूसा आदि के नरम बिछौने की व्यवस्था की गई थी?
  5.  क्या पशुका मिल्क फीवर के लिये इलाज हुआ या नहीं?

पशु का अधिक दिनों  तक बैठे रहने के कारणों में निम्न की भी जांच करेंः

  1. Muscular injury, Nerve Injury –  इसके लिये  बैठे हुए पशु के पैरों की स्थिति तथा इधरउधर हिलने की स्थिति देखें। इसमें Injection Vitamin B1 देकर रेस्पोन्स देखा जा सकता है।
  2. Muscular injury, Nerve Injury – इसके लिये  बैठे हुए पशु के कमर के पास पेल्विक बोन को दबा कर जाँच करें, पैरों को खिंच कर, हिला कर अन्य हड्डी में फ्रेक्चर की जाँच करें।
  3. Dislocation of hip joint – इसमें  पशु अपने पिछले पैरों को आगे कर डाॅग की तरह (dog sitting position) बैठता है। ऊपर पेल्विक बोन और फिमर के जोड़ पर डिस्लोकेशन होने से गड्ढे नजर आते हैं।
  4. Milk Fever – पशु मुँह फ्लेंक की ओर किये  बैठा रहता है। प्रायः ब्याने के बाद 72 घंटों में होता है। टेम्प्रेचर सबनॉर्मल होता है। इसमें कैल्शियम देने से अच्छा असर नजर जाता है।
  5. Septic Mastitis – इसमें भी पशु बैठा ही रहता है लेकिन साथ ही अडर में सूजन भी नजर आती है तथा दूध में भी बदलाव जाता है।

 उपचार

  1. Management – जब भी किसी रोग में पशु लगातार बैठा रहता है उसमें मेडिकल ट्रीटमेन्ट के साथ पशु का रख रखाव भी महत्वपूर्ण है। 
  • पशु को मदद के द्वारा अगले पैरों पर खड़े करना चाहिए। फिर खड़ा रखने के लिये सेा sling काम में लें जिसस शरीर पर घाव नहीं हो।
  • काफी कोशिशों के बावजूद भी खड़ा नहीं हो पाता है तो पशु के नीचे भूसा, रबर, ट्यूबपुराने गद्दे आदि का मोटा गद्देदार बिछौना बनाएं, ताकि शरीर पर घाव नहीं हो और मसल्स नर्वज का अधिक नुकसान नहीं हो। लेटे या बैठे हुए पशु को हर तीन घंटे बाद पलटना चाहिए।
  •  विदेषों में ऐसे रोगी पशु को एक टेंक के पानी में तैरती अवस्था में रखा जाता है। जिससे मांसपेषियों का नुकसान नहीं होता है, हार्ट फेफड़ों जोर नहीं पड़ता है।

2. थैरेपीइसके लिये कोई विषेश ट्रीटमेन्ट नहीं है इसलिये  symptomatic treatment ही दिया जाता है।

  • Injection Calcium borogluconate – 250 ml I/V very slow, 200 ml S/C
  • एग एल्बुमिनअंडो को फोड़कर पीला भाग निकाल लें, बचा हुआ शेश भाग एल्बुमिन कहलाता है। चालीस अंड़ो का एग एल्बुमिन एक ही बार में पशु को खिलाएं।
  • Injection Cortisone I/V ;k I/M
  • मेग्नेशियम फाॅस्फोरस साल्ट पाउडर NSS में मिलाकर I/V दें।
  • यदि nerve injury है तो विटामिन बी-1 थैरेपी दें।

रोग का निदान

यह एक जटिल कार्य होता है इसलिये सारी परिस्थितियों पर विचार कर ही प्रोग्नोसिस के बारे में कहा जाता है।

  • यदि बैठे हुये पशु के पिछले पैर सामान्य स्थिति में रखे होते हैं। पशु खड़े होने की  कोशिश भी करता है यदि पशु मेस्टाइटिस या मेट्राइटिस के कारण ही बैठा हुआ है तो पशु के बचने की उम्मीद होती है।
  • यदि पशु को कोई गंभीर नर्व की चोट या हिप जाॅइंट डिस्लाॅकेशन है, पिछले दोनों पैर फैले हुए चैड़े रखता है तो या कुत्ते की तरह बैठता है, पशु अपनी इच्छा से पैर हिला नहीं पाता है तथा अगले पैरों पर भी वजन नहीं झेल पाता है। ऐसे पशु के ठीक होने की उम्मीद नहीं होती है।

 

Read: मिल्क फीवर एक मेटाबोलिक बीमारी


डॉ. राजेश कुमार

स्नातकोत्तर पशु चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान,
पी.जी.आई.वी.ई.आर, जयपुर